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बैरसिया मे श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग

ईश्वर की शरण में जाने से भक्तों का होता है कल्याण : उपाध्याय
रिपोर्टर विनय पटेल
बैरसिया। राधे-राधे महिला मंडल संगठन, बैरसिया के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस पर पंडित दीपक उपाध्याय ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं सारगर्भित वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि ईश्वर अंशी हैं और समस्त जीव ईश्वर के अंश हैं। जब तक जीव ईश्वर की शरणागति ग्रहण नहीं करता, तब तक उसका कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने भक्ति, समर्पण और शरणागति के महत्व को सरल शब्दों में श्रोताओं के समक्ष रखा। भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि माता रुक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रविंदा, नग्नजिती (सत्या), भद्रा एवं लक्ष्मणा भगवान श्रीकृष्ण की प्रमुख अष्ट पटरानियाँ हैं। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण ने 16,100 वेदों की ऋचा स्वरूपिणी गोपियों के साथ विवाह कर सनातन धर्म की दिव्यता और करुणा का संदेश दिया। कथा के दौरान वृंदावन से पधारी प्रसिद्ध झांकियों ने भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी विवाह प्रसंग को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर महिलाओं सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया।

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