आबकारी विभाग के अधिकारी के संरक्षण में अवैध महुआ शराब कारोबार का भंडाफोड़, प्राइवेट व्यक्ति के जरिए हो रही वसूली – फ़ोन पे और नकद

छत्तीसगढ क्षेत्र में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक उच्च पदस्थ अधिकारी के संरक्षण में अवैध महुआ शराब के कारोबार से प्रतिदिन अन गिनत रुपये की वसूली की जा रही है। यह वसूली न तो किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा, बल्कि एक निजी व्यक्ति के जरिए की जा रही है, जो शराब माफियाओं से राशि वसूलने का जिम्मा निभा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित अधिकारी ने इस निजी व्यक्ति को अवैध शराब कारोबारियों से वसूली करने के लिए नियुक्त किया है। यह वसूली फ़ोन पे और नकद दोनों माध्यमों से की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हर दिन बड़ी संख्या में डीलरों से राशि इकट्ठी की जाती है और उसे अधिकारी तक पहुंचाया जाता है।
पुख्ता सबूत और स्क्रीनशॉट डीलरों की
इस भ्रष्टाचार के नेटवर्क की पुष्टि करते हैं। इन सबूतों में मोबाइल नंबर, राशि और तिथि की स्पष्ट जानकारी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह अवैध वसूली का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से अपील की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाए ताकि शराब माफिया और उनके संरक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
एक डीलर की पूरी कहानी
एक स्थानीय डीलर ने हिम्मत जुटाकर अपनी आपबीती बताई। उसके अनुसार, करीब दो ढाई महीने पहले आबकारी विभाग की पूरी टीम जिसमें अधिकारी और अन्य कर्मचारी शामिल थे उसके घर पहुंचे।
डीलर ने बताया
“वे लोग दीवार चढ़कर मेरे घर के अंदर आए और 5 लीटर महुआ शराब जब्त की। उन्होंने कहा कि मामला दर्ज करेंगे, लेकिन साथ ही एक व्यक्ति ने कहा कि अगर 30 हजार रुपए दे दो, तो केस नहीं बनेगा।”
डीलर के मुताबिक, पैसे न होने के कारण उसने अपनी मोटरसाइकिल गिरवी रखकर 30 हजार रुपए जुटाए और आबकारी दफ्तर जाकर दिए। उसे विश्वास दिलाया गया कि अब केस नहीं बनेगा।
लेकिन ढाई महीने बाद, 6 नवंबर 2025 को उसे एक नोटिस मिला कि उसका चालान कट चुका है और उसे कोर्ट में पेश होना है।
डीलर आगे कहता है —
“मैं दफ्तर गया और पूछा कि मैंने तो केस न बनाने के लिए 30 हजार रुपए दिए थे, फिर केस क्यों बनाया? तब अधिकारी और कर्मचारियों ने कहा कि हमने कोई पैसा नहीं लिया। मैंने कहा इसी दफ्तर में पैसा लाकर दिया हूँ तो केश क्यों बनाया है मेरा पैसा तीस हजार रुपए लौटाओ, लेकिन उन्होंने मना कर दिया और मुझे घर जाने दिया।”इस सारी बात मैने मीडिया को वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ बताया
डीलर का कहना है मैने मीडिया को बता दिया इसलिए कोट पेस नहीं किया या कही फरारी कोट को बता कर मुझे फसाने की कोशिश तो नहीं की जा रही




