कोरबा

कोरबा में सरकारी पशु चिकित्सक पर गंभीर आरोप


इलाज के नाम पर वसूली, लापरवाही से पालतू डॉग की मौत



संवादाता मोहन चौहान लाइव भारत 36 न्यूज


कोरबा।
जिले के मुड़ापार निवासी प्रमोद गुप्ता ने शासकीय पशु चिकित्सा विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर कार्यालय एवं उपसंचालक पशु चिकित्सा विभाग, कोरबा में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने शासकीय पशु चिकित्सक रामचरण साहू पर इलाज के नाम पर भारी रकम वसूलने और लापरवाही से उनके पालतू डॉग की मौत का जिम्मेदार होने का आरोप लगाया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रमोद गुप्ता के पालतू डॉग का इलाज 16 जनवरी 2025 से शासकीय पशु चिकित्सक रामचरण साहू द्वारा किया जा रहा था। इलाज के दौरान डॉक्टर द्वारा रोज़ाना 3 से 4 हजार रुपये तक की फीस वसूली जाती रही। यह सिलसिला 16 जनवरी से 23 जनवरी तक लगातार चलता रहा, जिसमें डॉक्टर द्वारा हर बार डॉग के ठीक होने का आश्वासन दिया जाता रहा।

इलाज के नाम पर 35,500 रुपये की वसूली
शिकायत में बताया गया है कि इलाज की अवधि के दौरान डॉक्टर रामचरण साहू ने फीस और दवाइयों के नाम पर कुल 35,500 रुपये लिए। यह राशि नगद एवं फोन पे के माध्यम से ली गई। सवाल यह उठता है कि जब डॉक्टर शासकीय सेवा में पदस्थ हैं, तो निजी तौर पर इस तरह भारी फीस वसूलना नियमों के खिलाफ नहीं है क्या?



इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत
प्रमोद गुप्ता के अनुसार, 23 जनवरी की शाम डॉक्टर रामचरण साहू ने डॉग को एक इंजेक्शन लगाया, जिसके कुछ ही समय बाद उसकी हालत गंभीर रूप से बिगड़ने लगी। डॉग को तड़पता देख पशु स्वामी ने तत्काल डॉक्टर को फोन कर इसकी सूचना दी, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने समय पर पहुंचना उचित नहीं समझा।


इलाज में लापरवाही और डॉक्टर के नहीं पहुंचने के कारण 23 जनवरी की रात लगभग 8 बजे डॉग की मृत्यु हो गई। इस घटना से पशु स्वामी और उसका परिवार गहरे सदमे में है। प्रमोद गुप्ता का कहना है कि यदि समय रहते डॉक्टर उपस्थित होते और सही उपचार किया जाता, तो डॉग की जान बचाई जा सकती थी।

सरकारी डॉक्टर की भूमिका पर उठे सवाल
शिकायत में प्रमोद गुप्ता ने कहा है कि ऐसे शासकीय पशु चिकित्सक, जो सरकारी सेवा में रहते हुए भी घूम-घूम कर इलाज करते हैं, मोटी फीस वसूलते हैं और इसके बावजूद सही उपचार नहीं करते, वे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करते हैं। यह मामला केवल एक पालतू डॉग की मौत का नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।


प्रमोद गुप्ता ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की वैधानिक जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में पैसे के लालच में और भी निरीह पशुओं की जान से खिलवाड़ होता रहेगा।


फिलहाल इस मामले में पशु चिकित्सा विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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