श्रीमद् भागवत मनोरंजन का ग्रंथ नहीं है बल्कि यह मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है रितिका नागर

रिपोर्टर विनय सिंह पटेल
बैरसिया तहसील के सेमरी खुर्द बर्री प्लांट स्थित हनुमान मंदिर परिसर आयोजित पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर पंचकुण्डात्मक रुद्र महायज्ञ में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक श्री रितिका नागर ने गोवर्धन लीला के साथ भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाया। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण और पूतना वध के साथ माखनचोरी की लीलाओं का वर्णन सुनकर मंत्रमुग्ध हो गए।
कथावाचक रितिका नागर ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मनोरंजन का ग्रंथ नहीं है बल्कि यह मनुष्य को जीवन जीने का कला सिखाता है और कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं से जहां कंस के भेजे विभिन्न राक्षसों का संहार किया, वहीं ब्रज के लोगों को आनंद प्रदान किया। कथा के दौरान भगवान गिरिराज पर्वत को उठाते हुए सुंदर झांकी सजाई गई। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु देर तक नाचते रहे। श्री रितिका नागर ने प्रसंग में बताया गया कि इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर घमंड हो गया था। उसका गर्व दूर करने के लिए भगवान ने ब्रज मंडल में इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन की पूजा शुरू करा दी। इससे गुस्साए इंद्र ने ब्रज मंडल पर भारी बरसात कराई। प्रलय से लोगों को बचाने के लिए भगवान ने कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। सात दिनों के बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ





